دل کے بہت قریب ہیں جو  مصطفیٰ مرے–نعت پاک

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نعت

دل کے بہت قریب ہیں جو  مصطفیٰ مرے

اللہ کے حبیب ہیں وہ مصطفیٰ مرے

جنت کی آرزو ہے جنہیں شوق با حیات

تو نقشے پا نصیب ہیں لو مصطفیٰ مرے

قایم ہے جن کے دم سے یہ حسن دو جہاں

صادق امیں حسیب ہیں وہ مصطفیٰ مرے

رہبر ہیں سب کے مولیٰ و سردار انبیا

سب کے ہیں اور مہیب ہیں وہ مصطفیٰ مرے

چمکا ہے قسمتوں کا ستارا طفیل  میں

آقا ہیں اور نجیب ہیں وہ مصطفیٰ مرے

اے شاہ بس گۓ ہیں امت کی آس میں

مولی ے از غریب ہیں وہ  مصطفیٰ مرے

दिल के बहुत क़रीब हैं वो मुस्तफा मेरे

अल्लाह के हबीब हैं वो मुस्तफा मेरे

जन्नत की आरजू है जिन्हें शौके़ बा हयात

तो नक्शे पा नसीब हैं वो मुस्तफा मेरे

कायम है जिनके दम से ये हुस्ने दो जहां

सादिक़ अमीं हसीब हैं वो मुस्तफा मेरे

रहबर हैं सबके मौला वो सरदारे अंबिया

सब के हैं और मुहीब हैं वो मुस्तफा मेरे

चमका है कि़स्मतों का सितारा तुफैल में

आका़ हैं और नजीब हैं वो मुस्तफा मेरे

ए शाह बस गए  हैं उम्मत की आस में

मौला ए अज़ ग़रीब हैं वो मुस्तफा मेरे

शहाब उद्दीन शाह क़न्नौजी